जो हर फ़िक्र को धुये मे उडाता है
वो हर पल मौत की तरफ़ कदम बडाता है
यही धुआ है सब दवाईयो पर भारी
जो मानस नित पिये शराब
करे संग अपने दुजो की ज़िन्दगी भी खराब
इसी शराब ने लाखो की दुनिया उजाडी
जो खाये पान मसाला और गुटखा
एक दिन खाये केन्सर का फटका
ये गुटखा लाये लाखो बिमारी
वैसे तो कोई मानने नही वाला
भेजे पर पर्दा पडा है काला
नशे की नही किसी से यारी
जो करे कोई भी नशा
समझो दलदल मे वो फसा
दूर ही रहने मे ही है समझदारी
जो दोस्त है नशे के संगी
उनको सिखाओ बाते चंगी
नशे से और भी है चीज़े प्यारी
बाप हो चाहे जितना बडा शराबी
बेटे को देना ना चाहे ये आदत नावाबी
ज़िन्दगी को अपनी ना बनाओ दुख्यारी
सरकार ने कितने विज्ञापन निकाले
फिर भी ना सोचे नशा करने वाले
आदत नशे की छोड दो सारी
नशेडी, शराबी, चरसी नाम पडे है
जो लोग ऐसे काम करे है
क्या खुश होती होगी ये सुनकर
मा, बहन और बीवी तुम्हारी?
कभी ना बसने दे घर किसी का
दुश्मन है ये घर की खुशी का
खुश रहोगे मान लो बात हमारी
काया को जाये निगल ये
करवा दे अपनो के कत्ल ये
इसने अच्छो- अच्छो की मत है मारी
मेरे ये दो शब्द पडकर
गर संभल जाये कोई गिरकर
उसकी रहुंगी मै आभारी