Sunday, January 16, 2011

***रात की बात****
 
दिल हल्का हो जाये  सोचकर रात भर 
आंखो को अश्को से भीगोते रहे 

हम राह तकते रहे बेचैन होकर और 
वो गैरो की तरह चैन से सोते रहे  
 
यु तो कहने के लिये हम साथ थे, 
मगर दिल से जुदा होते रहे 

उसने कहा भूल जाना मुझे मगर 
हम है कि ज़ख्म यादो के टटोते रहे  

ख्वाब भी सच हो जाते है, 
यही सोचकर ख्वाब मोहब्बत के संजोते रहे 

कुछ पा लेंगे हम भी ज़िन्दगी मे 
इसी आस मे अपना सब कुछ  खोते रहे 

पूजा तोमर 

Thursday, December 23, 2010


****ज़ख्म**** 

 मर्ज़ जानते है तो उसकी 
दवा क्यो नही देते 

 मेरी वफ़ा का मुझे कुछ 
 सिला क्यो नही देते

 जो राज़ दिल को ज़ख्म दे रहे है 
उन्हे बता क्यो नही देते 

 जो गम सताते है उन्हे 
मेरे घर का पता क्यो नही देते 

मै हूं नदी तू है सागर
मुझे खुद से मिला क्यो नही देते 

अगर है परेशानी "पूजा" से तो 
 इस नाचीज़ को भूला क्यो नही देते 

 पूजा तोमर

Monday, December 20, 2010

****आदत****

कैसे बहलाओ मै खुद को भला कभी-कभी 
महफ़िल मे भी दिल की वीरानी नही जाती 

मैने माना तुम सही कह् रहे हो मगर
कभी-कभी सही बात भी मानी नही जाती  

मै देखती हूं तुम्हे रोज़ मगर कभी-कभी 
अपनो की सूरत  भी पहचानी  नही जाती 

कभी-कभी लाख कौशिश कर लो 
मगर दिल की परेशानी नही जाती 

दिल भी जनता क्या बुरा है क्या भला 
मगर कभी-कभी आदत पुरानी नही जाती 



पूजा तोमर

Wednesday, December 1, 2010

****कातिल****

थक कर चूर हो गये है 
लम्बे सफ़र से आये है 

मेरे आंगन मे दिये 
तेरी महफ़िल से आये है

हमसफ़ है वो मेरे 
जो बनकर कातिल से आये है 

यू न रुसवा कर हमे जालिम 
हम यहा बडे दिल से आये है 

पूजा तोमर 

Sunday, November 28, 2010

***शौक**** 

तू अपना बना या कर दे बेगाना 
हम तूझपर इश्क़ करम करते रहंगे

अगर हो कातिल तूझसा हंसी तो 
हम अदा रकम करते रहंगे  

तू सुन ले की बोल दिया हमने 
मोहब्बत है और हरदम करते रहंगे

ये मोहब्बत और भी  बढती रहेगी
अपनी वफ़ा का हम सितम करते रहंगे

शौक है मिटने  का, आरजू है बरबाद होने की 
हम दिल लहु से लाल सनम करते रहंगे

पूजा तोमर

Tuesday, November 23, 2010

````नज़र````

मत और कुछ दे मुझे मेरे यार बस,
दे दे प्यार की मेरी दुनियाँ संवर जाए,

मै तेरी हूं तू बस मान ले इतना,
कि मेरी चाहत भी निखर जाए,

आज की ये रात सुहानी है बडी,
चांदनी रात मे सितारो पर नज़र जाए,

अब तो अपना ले मुझे कि तेरे नाम की,
बदनामी लेकर दिवानी किधर जाए,

कुछ भी देख लू जालिम लौटकर,
एक तेरे चहरे पर ही नज़र जाए,

मेरी वफ़ा को आज़मा के देख ले,
कि मोहब्बत का कर्ज़ उतर जाए,

तेरी यादो के मोती है आंखो मे मेरी,
साथ इनके दिवानी भी ना बिखर जाए,

अब तो तू देर न कर कुछ सोचने मे,
कि ज़िन्दगी इन्तज़ार मे न गुजर जाए,

तू मेरा हो जा या मुझे कर ले अपना,
इनमे से कोई एक बात ही ठहर जाए...!

पूजा तोमर

Thursday, November 18, 2010

****तेरी अदाए****

दोनो का पलडा एक सा है 
तेरे सितम और मेरी वफ़ाए

फिर भी मेरे मासूम कातिल
तूझे करती है प्यार मेरी दुआए 

इश्क़ तो आंखो से बया हो जाता है 
होठो से फिर चाहे लाख छिपाए  

सच का पता है झूठ की खबर है 
कह देती है सब तेरी अदाए

सब है तेरे पहलू मे जालिम  
किस को दिल का हाल सुनाए

तूने तो  लौटकर आना नही है 
हम क्यो अपना वक़्त गवाए 
पूजा तोमर